सोमवार, 14 जून 2010

तुझसे मिलने की फरियाद करते हैं....:- देव

बंधुओ, आज संध्या की बारिश और ट्राफिक से सम्बंधित कुंठाओ को दरकिनार करते हुए कुछ सार्थक बातचीत की जाए.... कुछ सृजनात्मकता की बात की जाए... कुछ ऐसी बातें हो जो मन को राहत पहुचाये.... और सुकून का एहसास करा जाए...

कुछ शब्द... यहाँ वहां जोड़ दिए हैं... कविता कहना शायद गलत होगा.. वैसे आखिरी फैसला आप लोगों पर छोड़ता हूँ...

जीवन के लिए जरूरी है...
कुछ कहना
कुछ सुनना
किसी का रूठना
किसी का मनाना
तू तू और मैं मैं...
से बात नहीं बनती....
तेरे बिन ज़िन्दगी की
शाम नहीं खिलती
सुबह का उजाला
और संध्या की लाली
तेरे बिन मेरी
शाम नहीं ढलती....
मेरे एकाकी लम्हे...
तुझे याद करते हैं
मेरे दोस्त तुझसे मिलने
सिर्फ और सिर्फ
तुझसे मिलने की फरियाद करते हैं....

-देव

11 टिप्‍पणियां:

indli ने कहा…
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दिलीप ने कहा…

bahut khoob...

सुनील दत्त ने कहा…

विलकुल सही बात

परमजीत सिँह बाली ने कहा…

अपने मनोभावों को बहुत सुन्दर सब्द दिए हैं।बधाई।

Jandunia ने कहा…

सार्थक पोस्ट

शिवम् मिश्रा ने कहा…

हद हैँ यार, 21 मेँ अब दिन ही कितने बचे हैँ? थौडा तो इन्तजार करो।

Udan Tashtari ने कहा…

वाह, क्या बात है..धार खुद ब खुद आ ही जाती है.

'अदा' ने कहा…

bahut khoob...!!

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति संवेदनशील हृदयस्पर्शी मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी कविता।

Panchram Ratre ने कहा…

दिल को छू ग़ई