बुधवार, 4 अगस्त 2010

एक झलक (एलोरा केव्स की)

देव बाबू स्पत्नीक अपनी मारुति आल्टो में सवार हो कर अपनी ससुराल से एलोरा केव्स की यात्रा पर निकले। दिन शनिवार २४ जुलाई २०१०.... सुहाना मौसम.... बादलों से घिरा हुआ..... सडक मार्ग के चारो ओर हरे भरे वातावरण को देख कर देव बाबू अति प्रसन्न हो रहे थे.... वाह वाह

बादलों से घिरी पहाडियों के बीच यह हरियाली मन को बहुत सुकून दे रही थी।

अब शुरु होती है एलोरा केव्स की यात्रा की गाथा.... टिकट: हिन्दुस्तानिओं के लिए मात्र दस रुपये.... और हमारे गोरे(फ़्रेंच) दोस्त सिड्रीक के लिए २५० रुपये.... वाह हिन्दुस्तान की सरकार हिन्दुस्तान आनें वाले पर्यटकों को भी अच्छे से लूटती है।

लीजिए पहला चित्र.... सांपों से सावधान..... (अरी गज्जब) डेराईए मत ही ही..



यार हिन्दी की हिन्दुस्तानिओं नें अच्छे से बैंड बजाई है... यकीन ना आए... तो फ़िर यह देखिए...


अभी तैयार हो जाईए, एलोरा केव्स में जानें के लिए..... यह है मुख्य द्वार...








यह गुफ़ा क्रमांक १६ की तस्वीर है, जो एकदम सामनें ही आती है... इसका इतिहास कुछ यूं है..... लीजिए










इसको पढने के लिए इमेज पर क्लिक करिये.... ई बडका विन्डो में ओपेन हो जाएगा।











लीजिए अब कुछ चित्र अन्य गुफ़ाओं के....





गूफ़ा क्रमांक-१६ के भीतर का चित्र












इसको ध्यान से देखिए... पूरी रामायण है यह











ई है हाथी....


















देव बाबा सुन रहे हैं और मनीषा जी कुछ सुना रहीं हैं.....
































































वाह वाह.... आसमां का रंग देखिए.....











लीजिए भाई अभी इनका इतिहास भी पढ लीजिए.... विकीपीडिया से साभार लिया है.....

इतिहास:- एलोरा या एल्लोरा (मूल नाम वेरुल) एक पुरातात्विक स्थल है, जो भारत में औरंगाबाद, महाराष्ट्र से 30 कि.मि. (18.6 मील) की दूरी पर स्थित है। इन्हें राष्ट्रकूट वंश के शासकों द्वारा बनवाया गया था। अपनी स्मारक
गुफाओं के लिये प्रसिद्ध, एलोरा युनेस्को द्वारा घोषित एक विश्व धरोहर स्थल है।

एलोरा भारतीय पाषाण शिल्प स्थापत्य कला का सार है, यहां 34 "गुफ़ाएं" हैं जो असल में एक ऊर्ध्वाधर खड़ी चरणाद्रि पर्वत का एक फ़लक है। इसमें हिन्दू, बौद्ध और जैन गुफ़ा मन्दिर बने हैं। ये पांचवीं और दसवीं शताब्दी में बने थे। यहां 12 बौद्ध गुफ़ाएं (1-12), 17 हिन्दू गुफ़ाएं (13-29) और 5 जैन गुफ़ाएं (30-34) हैं। ये सभी आस-पास बनीं हैं, और अपने निर्माण काल की धार्मिक सौहार्द को दर्शाती हैं।

एलोरा के 34 मठ और मंदिर औरंगाबाद के निकट 2 किमी के क्षेत्र में फैले हैं, इन्हें ऊँची बेसाल्ट की खड़ी चट्टानों की दीवारों को काट कर बनाया गया हैं। दुर्गम पहाड़ियों वाला एलोरा 600 से 1000 ईसवी के काल का है, यह प्राचीन भारतीय सभ्यता का जीवंत प्रदर्शन करता है। बौद्ध, हिंदू और जैन धर्म को भी समर्पित पवित्र स्थान एलोरा परिसर न केवल अद्वितीय कलात्मक सृजन और एक तकनीकी उत्कृष्टता है, बल्कि यह प्राचीन भारत के धैर्यवान चरित्र की व्याख्या भी करता है। यह यूनेस्को की विश्व विरासत में शामिल है।

-देव

14 टिप्‍पणियां:

शिवम् मिश्रा ने कहा…

देव बाबु नौकरी काहे छोड़ने की सोच रहे हो भाई ??

ऐसा इस लिए पूछ रहे है ................

तुम तो यार पत्रकार बन गए हो ...............

बढ़िया रिपोर्ट दिए हो !!

वैसे एक बात बोले ........... यह तो अब होना ही है कि बहुरिया बोलेगी और तुम सुनबे करोगे !! वहाँ नहीं भी लिखते तो चल जाता ! ;-)

E-Guru Rajeev ने कहा…

देव बाबा (!!) सुन रहे हैं और मनीषा जी कुछ सुना रहीं हैं.....
अरे बाबू से फिरो बाबा बन गये, स्कुल बेग टांग के !!
ही ही ही

राजभाषा हिंदी ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
राजभाषा हिन्दी के प्रचार प्रसार मे आपका योगदान सराहनीय है।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति देव बाबा।

Stuti Pandey ने कहा…

देव बाबा सुन रहे हैं और मनीषा जी कुछ सुना रहीं हैं.....

- गयी भैंस पानी में!

देव कुमार झा ने कहा…

भाई लोगों,
अपनी बीवी की दुनियां में कौन नहीं सुनता है....
भैया हम खाली पब्लिकली एनाऊंस किये है बस.

बोले तो घरवाली ज़िन्दाबाद....

ही ही

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

बहुत सुंदर चित्र एलोरा के .......
और देव तथा मनीषा के भी ....

.परिचय तो diya नहीं aapne ......?

अब इतना भी मत सुना कीजिये की भैंस ही पानी में जाने लगे ......!!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…


पिछले साल हमें भी सौभाग्य मिला था, देखने का। वे यादें फिर से ताजा हो गयीं।

…………..
अंधेरे का राही...
किस तरह अश्लील है कविता...

Akshita (Pakhi) ने कहा…

अले वाह, आपने तो बैठे-बैठे घुमा दिया...
________________________
'पाखी की दुनिया' में 'लाल-लाल तुम बन जाओगे...'

शिवम् मिश्रा ने कहा…

एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं !

Udan Tashtari ने कहा…

यह तो अब फोटो हैंचने का बात ही नहीं बचा कि देव बाबा सुन रहे हैं और मनीषा जी सुना रही हैं...यह तो अब हमेशा ही रहेगा...


कभी जब देव बाबा बोलें और मनीषा जी सुने-तब बात फोटो हैंचने की आयेगी...याने विलक्ष्ण क्षण-उसी का न फोटो खिंचाता है.


बढ़िया रहा एलोरा घुमाई..आनन्द आ गया.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

चित्र तो बहुत सुन्दर हैं। जोड़ा को किसी की नज़र न लगे, काला टीका लगा दीजिये एक दूसरे को।

JHAROKHA ने कहा…

alora caves ke baare me jitna padha tha utni hi jankaari thi lekin aapki post padh kar isme aur badhottri ho gai. itni achhi baat batane ke liye
dhanyvaad dev ji.
poonam

सुमन'मीत' ने कहा…

आज पहली बार आपके ब्लोग पर आई हूँ ......देखते ही रूह खुश हो गई........बहुत सुन्दर चित्र.............