मंगलवार, 8 जून 2010

श्रेष्ठ कौन: राम, रावण या बालि... :-देव


राम राम जय जय राम, श्री राम श्री राम जय जय राम....

राम... आखिर इन दो अक्षरों की महत्ता आखिर क्या है.... आज शाम मित्रों के साथ होने वाली ऐसे ही बकर बकर में भगवान राम का ज़िक्र हो आया और हमारे मित्र दीपक जी ने बिन सोचे और बिन जाने हुए ही राम पर बालि और रावण की श्रेष्ठता पर प्रवचन दे डाला.... बोले की राम ने क्षल से बालि का वध किया और फिर भी हम राम को देवता मानते हैं और राम की पूजा करते हैं... हद तो तब हुई जब उन्होंने रावण को भी राम पर श्रेष्ठ कह डाला.... यकीन मानिए मुझे कोई हैरत नहीं हुई क्योंकि मैं नहीं जानता की उनकी सोच, विचारधारा और पारिवारिक प्रष्ठभूमि किस प्रकार की है.... और व्यर्थ की बहस में पड़ने के स्थान पर चुप रहना ही भला लगा... मगर हैरत हो रही थी की सामने वाला बंदा चुप होने का नाम ही नहीं ले रहा था और हाथ धो के पीछे ही पड़ गया था..... अब पानी देव बाबा के सर के ऊपर से जा चुका था और चुप रहना भी उसकी सत्ता को स्वीकारने के समान लग रहा था.....

बस तो फिर प्रवचन चालू.... लीजिये आप लोग भी उसका सार सुनिए..... बालि का चरित्र यकीनन बहुत बेहतर होता यदि उसनें अपनें छोटे भाई की पत्नी का हरण ना किया होता... यदि बालि का अपराध केवल सुग्रीव का राज्य हथियानें तक ही सीमित होता तो निश्चित ही रघुनाथ नें उसके प्राण नही हरे होते। तुलसी दास जी ने लिखा है...

मैं बैरी सुग्रीव पिआरा। अवगुन कबन नाथ मोहि मारा।।
अनुज बधू भगिनी सुत नारी। सुनु सठ कन्या सम ए चारी।।
इन्हहि कुद्दष्टि बिलोकइ जोई। ताहि बधें कछु पाप न होई।।
मुढ़ तोहि अतिसय अभिमाना। नारि सिखावन करसि न काना।।
मम भुज बल आश्रित तेहि जानी। मारा चहसि अधम अभिमानी।।

प्राण त्यागते हुए बालि नें राम से प्रश्न किया, मेरा बैर तो सुग्रीव से था... मैनें राम से तो कोई द्रोह नहीं किया... तो भी मैं इस प्रकार की गति का भागी कैसे बन गया। इस पर राम का उत्तर “अनुज बधू भगिनी सुत नारी” छोटे भाई की पत्नी पुत्री के समान है और उसका हरण से बढकर कोई पाप नहीं है... सो राम के राज्य में इस प्रकार के अधमी को निश्चय ही प्राण दंड मिलना था। आखिर राम द्रोह ही तो है यह... बालि कैसे राम से श्रेष्ठ हो सकता है। दर-असल रामायण में नैतिकता और सामाजिक न्याय की ही प्रधानता है, सो बालि को मिला दंड निःसंदेह उचित है।

अब दूसरी तुलना थी राम और रावण की... दीपक भाई पीछे लगे थे की रावण नें नारी के साथ बुरा बर्ताव किया तो राम नें भी तो सीता को वन में भेज दिया... वह भी तब जब सीता गर्भवती थीं, तो फ़िर राम और रावण में ज्यादा फ़र्क कैसे? बहुत क्रोध आया यह सुन कर की एक इंजीनियर की ऐसी सोच है.... इतना पढा लिखा होनें के बाद भी बुद्धि एकदम बेकार... क्या करता.... बताईए आप लोग ही सद-बुद्धि दीजिए ऐसे गोबर गणेश को.... समझाना भी उसी के लिए उचित है जिसके लिए तर्क नाम की चीज़ का कोई अर्थ हो.... यहां तो इन बन्धू को समझाना किसी महाभारत से कम नहीं हो रहा था।

फ़िर भी कोशिश करके देखनें में कोई हर्ज नहीं जानते हुए बन्धू को समझाया की हे मित्र, रावण का अपनें स्वार्थ के लिए पर-स्त्री का हरण और निज स्वार्थ में सम्पूर्ण राज्य की बलि दे देना और अपने सम्पूर्ण कुल का विनाश कर देना और राम का प्रजा के केवल एक स्वर पर सीता का त्याग कर देनें में कोई कैसे तुलना कर सकता है। यकीनन राम का सीता के साथ किया हुआ बर्ताव राम के निज चरित्र के लिए एक बहस का मुद्दा हो सकता है परन्तु एक राजा की तरह राम का निर्णय कहीं से भी गलत नहीं होगा। राम एक राजा भी थे और राम के लिए उनका सीता के प्रति कर्तव्य के साथ साथ प्रजा का भी ध्यान रखना भी प्राथमिक कर्तव्य था। अब कोई आज कल की मिली जुली गठबन्धन वाली सरकार तो थी नहीं जो मेरा काम बनता और भाड में जाए जनता के फ़ंडे पर काम करे... वह तो राम राज्य था, प्रजा के हित राजा के लिए सर्वोप्परि थे। प्रजा की रुचि, प्रजा की अरुचि... राजा के निजी सुख से उपर थे... सो एक राजा की नज़र से देखिए तो राम का चरित्र समझ में आ जाएगा। वैसे मेरा प्रवचन देनें का कोई मन ना था मगर आज कल के ज़मानें में जब कोई राम जैसे चरित्र पर प्रश्न चिन्ह लगाता है तो फ़िर बोलना धर्म बन जाता है।

आखिर राम पर कैसे कोई प्रश्न चिन्ह लगा सकता है..... दीपक भाई अन्त में बोले की तुम तो बीजेपी वाले हो गये हो राम राम करनें लगे हो... अब इनको क्या कहें... राम का नाम लेनें से कोई बीजेपी या कांग्रेसी हो जाएगा..... राम से बीजेपी है या बीजेपी से राम.... और फ़िर अगर कांग्रेसी सोच राम के अस्तित्व को ही झुठलानें पर तुली हुई है तो फ़िर अगर हमें बीजेपी की सोच वाला ही बता दिया जाए तो अच्छा है। यार मेरी समझ में एक बात कभी नहीं आई की आखिर राम का राजनीतिकरण क्यों हो गया.... जब कोई आदमी गिरता है तो दूसरा यह कहेगा ना ओह्ह राम राम चोट लग गई, या फ़िर सामान्य सम्बोधन.... राम-राम भैया कैसे हो.... कोई यह कहता है क्या सोनिया सोनिया कैसे हो... या फ़िर मनमोहन मनमोहन कैसे हो..... कोई यह कहेगा क्या की आडवाणी आडवाणी कैसे हो..... यार राम को राम रहनें दो और बिना फ़ज़ूल की बातों में राम के नाम को ना घसीटो.... राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं और समस्त मानव जाति के लिए प्रेरक तत्व हैं।

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे

-देव

18 टिप्‍पणियां:

शिवम् मिश्रा ने कहा…

भैया राम को तो हम भी पूजते है पर कृष्ण जी से कम .......कारण सिर्फ़ एक......... दुसरे के भले के लिए अगर झूट भी बोलना पड़ा तो कृष्ण जी ने बोला और धर्म की रक्षा भी की | तो बोल भैया बंसी वाले की ........................जय |
बोल भैया राधे रानी की ........................जय |
वैसे तुम जो कहे हो उस में भी बहुत दम है ........
तो बोल भैया देव बाबा की...............जय |


हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे

महफूज़ अली ने कहा…

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे...

दिलीप ने कहा…

dev baba...baat to sahi kahi aapne...waise main bas itna kehna chahta hun ki vaalmeeki ramayen me seeta ke tyaag ki baat ka ulleekh hi nahi hai...aisa maine ek mahatma se suna...fir meri matashri ne bhi yahi bataya...aur kaha ye tulsi ramayan me hai...vaalmeeki ramayan me ye prasang to hai hi nahi...baaki raavan uske samaan gyaani to koi tha hi nahi...ab usse mahan kaun hoga jisne apni hi mrityu ke liye itna bada naatak kiya...jabki usne kabhi seeta ji ko sparsh tak nahi kiya....

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

बालमीकि रामायण के अनुसार बालि को राक्षस के हाथोँ मरा जानकर भाग आया और उसने माँ समान बड़ी भाभी को अपनी पत्नी बना लिया । वापस लौटकर बालि ने अपनी पत्नी को वापस ले लिया और ग़ददार भाई को भगा दिया । अब बताइये ग़लत कौन था बालि या सुग्रीव ?

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

तुलसीदास जी ने राम जी को सुग्रीव के पाप से अनजान दिखाकर उनकी महिमा को कम करने का अपराध किया है । मेरे प्रिय राम कभी ग़लत आदमी का साथ दे सकते हैँ , ऐसा मानने के लिये मैँ तो हरगिज़ तैयार नहीँ हूँ ।

Neeraj Trivedi ने कहा…

bas ek hi baat,
jaa ki rahi bhawana jaisi, prabhu murat tih dekhi taise.....
so aap log jaisa chahe maan sakte hai ...yadi aapke ander ram hai toh aapko sahi lagega , ravan hai toh ravan sahi lagega aur yahi bali hai toh bali sahi lagega....

bas ek baat yaad rakhe ...
Jai shri ram

Bharat ने कहा…

देव जी, आज से हमनें हिन्दी ब्लागिंग की दुनियां में कदम रख दिया है। प्रथम पोस्ट आपकी आज की इसी पोस्ट से प्रेरणा प्राप्त है और रामायण के कुछ अन्य बिन्दुओं पर प्रकाश डालनें का एक प्रयास मात्र है।

राम भक्ती के रस में डूबी हुई प्रतिक्रियाएं देखकर मन गदगद है, वाकई राम किसी धर्म/सम्प्रदाय के ना होकर मानव मात्र के लिए प्रेरक तत्व हैं।

-भरत
http://bharat-ki-bhasha.blogspot.com/2010/06/blog-post.html

Udan Tashtari ने कहा…

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे

आचार्य जी ने कहा…

आईये जानें ... सफ़लता का मूल मंत्र।

आचार्य जी

मनोज कुमार ने कहा…

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे

P.N. Subramanian ने कहा…

हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे
हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे

कुश ने कहा…

अच्छा विषय चुना है देव.. इस मुद्दे पर बहसे तो कई देखी है मैंने पर निष्कर्ष निकलते हुए कही नहीं देखा.. पता नहीं लोग देवी देवताओं को राजनीति में क्यों ले आते है.. राम की बात करने वाले को बीजेपियन कहना विकृत मानसिकता दर्शाता है.. खैर तुम्हारा दोस्त अच्छा है उसने ज्यादा कुछ नहीं कहा वरना लोग तो भगवान राम को छिछोरे कहने में भी संकोच नहीं करते..

नेट पर इससे पूर्व में भी ऐसी ही एक बहस पढ़ चुका हूँ.. उस पर आयी टिप्पणिया भी पढने योग्य है.. फुर्सत से पुरी पोस्ट और एक एक टिपण्णी पढो.. इस लिंक पे क्लिक करके..

संजय भास्कर ने कहा…

देव बाबा की...............जय |

संजय भास्कर ने कहा…

badhi hi duvidha me daal diya yaar

संजय भास्कर ने कहा…

ravan bhi koi bura aadmi nahi thaa

'अदा' ने कहा…

यार राम को राम रहनें दो और बिना फ़ज़ूल की बातों में राम के नाम को ना घसीटो.... राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं और समस्त मानव जाति के लिए प्रेरक तत्व हैं।

वैसे कोई और पोस्ट होती तो कुछ न कहती...लेकिन बात रामचंद्र जी की हो रही है...
और वो 'बिना फ़जूल' नहीं होनी चाहिए....
यहाँ सिर्फ 'फ़जूल' शब्द लगेगा...'बिना फ़जूल' नहीं.....वर्ना माइनस माइनस प्लस हो जाएगा...
हाँ नहीं तो...!!

'अदा' ने कहा…

aasha hai aapne anytha nahi liya hoga..

गिरिजेश राव ने कहा…

मूल वाल्मीकि और रामचरितमानस दोनों में सीता त्याग प्रसंग नहीं है .