शुक्रवार, 7 मई 2010

मैनेजरवा पटेगा बे... थोडा मेहनत करो और का

बहुत थकान के बाद आज घर पहुंचे... डाउन अमेरिका का मार्केट हुआ और हालत अपनी पतली हो गयी... ससुरा अंतर्राष्ट्रीय कंपनी में काम करोगे तो और क्या मिलेगा.... वैसे कोई बात नहीं... आज की दिहाड़ी थोड़ी थकावट से भरी रही और शनिवार और रविवार आने का एहसास किसी मौज से कम नहीं भाई.... बस घर आ गए....

अभी अभी अपने विवेक भाई (विवेक रस्तोगी कल्पतरु वाले) साहब का एक मेल देखा... साफ्टवेयर इंजीनियर की लाइफ सायकिल पर... पढ़ कर गुड-गुड भी लगा और अपनी पोजीसन देख के मन ही मन थोड़ी कुढ़-कुढ़ भी हुई... क्या करेंगे भाई... अब हम तो ठहरे साफ्टवेयर इंजीनियर.. कोई और हमारी कहानी हमसे भी अच्छी सुना जाये तो फिर तो मजा आइबे करेगा | वैसे आज इधर उधर की बकवास नहीं करूँगा और सीधा मुद्दे की बात पे आता हूँ, पिछली पोस्ट पे बोला था ना की मैनेजर को पटाने के १०१ तरीके बताऊंगा... सो लो अपना वादा पूरा कर रहा हूँ और पहली पेशकश आपके सामने...

ज़रा गौर फरमाइए जनाब....

सीता राम सीता राम
जपते रहिये
जो कहे मैनेजर
सुनते रहिये
दोनों कान एकदम
साफ़ सुथरा रखिये
एक कान से सुनये
दूजे से तजिए
काम रहे या ना रहे
बिजी बिजी दिखिए
फ्री होने पर भी
हाय हाय करिए
काफी और चाय ब्रेक
चाहे चार बार करिए
उसको हमेशा आप
पटाए ही रखिये
और एक बात सबसे ज़रूरी
ध्यान से सुनिए
आप सुनते हैं उसकी
कहा मानते हैं उसकी
उसे हमेशा इसी धोके में रखिये
सीता राम जपिए
सुनते रहिये...

वैसे अगर मेरे मैनेजर ने मेरा ब्लॉग पढ़ लिया तो भैया फिर तो समझ लीजिये की मेरा क्या हाल होगा.... बस वाट लग जाएगी.... तो बंधुओ इतना रिस्क ले कर आप लोगों को बता रहा हूँ... तो फिर मस्त रहिये और देव बाबा के बाकी ज्ञान का इंतज़ार करिए....

-देव

6 टिप्‍पणियां:

शिवम् मिश्रा ने कहा…

बहुत सही जा रहे हो देव बाबा !! पर सच में अगर किसी दिन नज़र पढ़ गयी मैनेजर की तो ..........................???

nilesh mathur ने कहा…

बहुत बढ़िया तरीके बता रहे हैं, लगे रहिये!

संजय भास्कर ने कहा…

good work

Vivek Rastogi ने कहा…

सीधा मैनेजर को टार्गेट करे हो बचुवा, अगर ब्लॉग पढ़ लिया न तो बस काम तमाम समझो :)

पर ये तो एक ही तरीका हुआ १०० बाकी हैं :(

Udan Tashtari ने कहा…

ये १०१ तरीका बताने मे भी मल्टी नेशनल की तरह कोताहि...


चलो, ये पढ़ो..१०१ नहीं, दो चार तो मिल जायेंगे:

http://udantashtari.blogspot.com/2006/11/blog-post_10.html

राम त्यागी ने कहा…

मजा आ गया भाई इधर आकर तो ...वैसे मेनेजर को हमारी जरूरत है, हमें उसकी नहीं ...हम तो इसी सूत्र पर चलते है, और खुश रहते है.