शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

पराठे और चाय : डाऊनलोडिंग सर......

कल रात नींद थोडी कम हुई और फ़िर सुबह सुबह घरवाली को उसके हास्पीटल छोडनें के बाद आराम से बिस्तर पर चद्दर ओढ के लेट लिए.... भारत आस्ट्रेलिया का मैच चालू है सो टीवी चला लिए... लेकिन थोडी ही देर में म्यूट करके ऊंघनें लगे... वाह दिवा-स्वप्न देखनें का अपना ही मजा है.... सपनें में तो हम शहंशाहे-हिन्दुस्तान हैं.... या कहें उसके भी बाप हैं..... एकदम आनन्द से सपनें में मौज ले रहे थे....  भई वाह.... 

लेकिन तभी...  शिवम भईया का काल आ गया.... बोले का कर रहे हो.... हम बोले ऊंघ रहे हैं..... हम उनको पूछ दिये की आप का कर रहे हैं... ऊ कहे की हम परांठे और चाय का आनन्द ले रहे हैं.... हम कहे ज़ल्दी से भिजवाईए तो ज़रा..... बस फ़िर क्या.... शिवम भईया दनदनाते हुए दो पराठे (आम के अचार के साथ) और एक प्याली चाय अटैचमेंट में डाल के भेज दिये.... हम भी भनभनाते हुए डाऊनलोड किये और मौज ले के खा गये... 

बताईए तो क्या गज्जब ख्याल है.... अगर साईंस की तरक्की से सभी का भला हुआ है तो फ़िर क्यों न हम जैसे काहिलों का भी कुछ भला हो.... 
  • भूख लगा हो तो मैकडोनाल्ड्स की साईट से एक बर्गर डाऊनलोड कर लिया जाए...
  • मैनपुरी से मुम्बई अटैचमेंट में पराठे, अचार और एक प्याली चाय भिजवाई जा सके.... 
ज़रा सोचिए तो..... कितना भला हो जाए.... पति बेचारा आफ़िस में ठंडा टिफ़िन खाए उससे अच्छा है न की पत्नी गरमा गरम पका के ठीक लंच टाईम पर पति को अटैचमेंट में डाल के लंच भिजवा दे.... और पति को गरम खाना नसीब हो जाये..... लेकिन कोई इस दिशा में सोचता ही नहीं.... बेकार के रिसर्च सेंटर सब.... हमरे जैसे आदमी के लिए तो सब बेकार.....  

वैसे दिवा-स्वप्न आप भी देखा कीजिए भाई.....  बडा आनन्द आता है.... हम भी ऊंघते हुए और बेख्याली में जो लिख मारे उसको अब आप सब झेलिए.....  

हम जा रहे हैं किचन में घरवाली के लिए लंच बनायेंगे और गरमा-गरम भिजवाएंगे..... अटैचमेंट से... ;)

15 टिप्‍पणियां:

शिवम् मिश्रा ने कहा…

देव बाबा की जय हो ... ऐसे ख्याल भाई तुम को ही आ सकते है ... कॉपी राईट है तुम्हारा ऐसे सपनो पर ... जय हो ...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

हम आलसियों के लिये विज्ञान को प्रगति करनी पड़ेगी...

देव कुमार झा ने कहा…

कोई सोचता ही नहीं अपनें बारे में... ;)

अख़तर क़िदवाई ने कहा…

उम्दा पोस्ट :)

देव कुमार झा ने कहा…

शिवम भईया, धन्यवाद धन्यवाद... कापीराईटेड ड्रीम्स ;-)

देव कुमार झा ने कहा…

धन्यवाद सर

Vivek Rastogi ने कहा…

हम भी बहुत दिनों से यही सोच रहे हैं कि वैज्ञानिक कोई काम की चीज का अविष्कार क्यों नहीं करते जैसे कि इतनी सारी किताबें पढ़ना पढ़ती हैं, उसकी जगह उसकी कोई टेबलेट बना दें, तो बस फ़िर फ़लाने विषय की टेबलेट खाई और ज्ञानी बन गये, वैसे परांठें अटैचमेंट से आ जायें तो आज शाम का भोजन देव भाई के हाथ का हो जाये। :)

देव कुमार झा ने कहा…

हा हा, वैसे आईडिया ज़बरदस्त है.... हिन्दुस्तान के सारे रिसर्च सेन्टर इस दिशा में कुछ सोचते ही नहीं...

Stuti Pandey ने कहा…

घरवाली के साथ ऐसा काम बिलकुल मत कीजियेगा..नहीं तो मायके जाने केटिकट भी तुरंत आ जाएगा, वो भी 'अटैचमेंट' में.

देव कुमार झा ने कहा…

ha ha :-)

शिवकुमार ( शिवा) ने कहा…

आपकी पोस्ट पढकर अच्छा लगा . बधाई .

सदा ने कहा…

बहुत खूब

वृजेश सिंह ने कहा…

होली की हार्दिक शुभकामना देव कुमार जी। बनारस की होली का अपना अलग अंदाजा है। अच्छा है वर्चुअल दुनिया के दोस्तों की जिंदगी को और आसान बनाने के बारे में सोच रहे हैं।

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति...

कविता रावत ने कहा…

हम जा रहे हैं किचन में घरवाली के लिए लंच बनायेंगे और गरमा-गरम भिजवाएंगे..... अटैचमेंट से... ;)
..aisa kya to ghar mein khana banane se kahin inkar n kar len... aur aapko khana banana pade...
waise kabhi ghar mein khana banakar gharwali ko khila denge to sach mein wah bahut khush hoti....
bahut badiya prastuti..