शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

माता-पिता.... देव बाबा की एक कविता.....

माता-पिता

बोध
संसार का
बोध
सत्य और असत्य का
बोध
ऊंच और नीच का
हे पिता
पाया बस आप ही से पाया
जीने का साहस
बुद्दि और विवेक
और धैर्य
हे पिता
पाया बस आप ही से पाया

और हे मां
तुझसे पायी ममता
निःस्वार्थ भाव भक्ति
प्रेम और करुणा
भावनाओं की अभिव्यक्ति
कभी भी
पीछे ना हटनें का साहस

हें पिता और माता
धन्य हुआ जीवन
धन्य हुआ यह तन मन
हे मां... हे पिता...

10 टिप्‍पणियां:

shekhar suman.. शेखर सुमन.. ने कहा…

mast.. :)

शिवम् मिश्रा ने कहा…

जय हो ...

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

मातृदेवो भवः, पितृदेवो भवः ...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

शब्दशः सच

संगीता पुरी ने कहा…

हें पिता और माता
धन्य हुआ जीवन
धन्य हुआ यह तन मन
हे मां... हे पिता...

बहुत खूब !!

देव कुमार झा ने कहा…

:-)

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई…

रश्मि प्रभा... ने कहा…

यह एक सम्मान है- अनुकरणीय

सदा ने कहा…

बहुत ही बढि़या ...आभार ।

संजय भास्कर ने कहा…

आप का ह्र्दय से बहुत बहुत
धन्यवाद,
इस कविता के लिए देव भाई