शुक्रवार, 27 अगस्त 2010

जय बुद्दिजीवी................... चुप..... बुद्दुजीवी.... :-देव

आज कल देव बाबा का पाला बहुत बड़े बड़े बुधियारो से हो रहा है.... बुधियार मतलब... बुद्धिजीवी लोग... अभी यह पूछिए बुद्धिजीवी कौन होता है.... तो भैया बुद्धिजीवी वह प्राणी होता है जो भैंसों को ना गिन कर भैंसों की टाँगे गिनकर चार का भाग देता है.... और तो और भैया अगर कैलकुलेशन में कोई दशमलव का आंकड़ा आ जाए तो फिर उसकी डाटा क्वालिटी के लिए चार बन्दों को धंधे पे और लगा देता है..... ससुर के नाती ई कौन तरह का काम हुआ... भगवान् जाने... मगर साहब बुद्धिजीवी तो फिर बुद्धिजीवी ही है ना.... सो चाहे कुछ भी हो जाये बाज़ नहीं आता है....

वैसे भगवान् बचाए ई बुद्धिजीविओं के चंगुल से... असल में मामले को काम्प्लीकेट करनें में इनको अजीब सा आनन्द मिलता है। यह आनन्द हम और आप जईसे साधारण आदमी की समझ के बाहर की बात है भाई।

बहुराष्ट्रीय कंपनियों में तो ऐसे बुद्धिजीवियों की भरमार है ही... एक ढूंढिये हज़ार मिलेंगे..... और सलाह भी देंगे... हमरे शशि भैया एक बात कहते हैं..... कोई काम ना करो.... केवल काम की फ़िक्र करो.... और फ़िक्र से अधिक उस फ़िक्र का ज़िक्र करो..... तरक्की मिलेगी.... समझे की नाहीं..... बस हाय तौबा मचाए रहो.... चिचियाए रहो.... बहुत बहुत काम है और अपनें कम्प्यूटर का मानीटर घुमाए के मस्त टाईम पास करो..... बस बुद्दीजीवियों को प्रणाम करते हुए ई पोस्ट डाल रहा हूं।

अऊर त सब ठीकै बा..... कल हिन्दुस्तान और श्रीलंका के मैच होई.... कल मैच देखेंगे..... कोशिश करेंगे हिन्दुस्तान को जितानें की..... चलिए सुतै जाए अबहीं... जय राम जी की.....

-देव

4 टिप्‍पणियां:

Pratul ने कहा…

देव बाबू,
आज से केवल प्रशंसा ही सुनना.
कमाल की पोस्ट है.
बेहतरीन,
लाजवाब.
उम्दा.
गजब.
क्या कहने.
वाह-वाह,
आप तो मन की बात कह दिए.
लगे रहो.

ललित शर्मा-للت شرما ने कहा…


उम्दा पोस्ट-सार्थक लेखन के लिए आभार

प्रिय तेरी याद आई
ब्लॉग4वार्ता पर आपका स्वागत है

शिवम् मिश्रा ने कहा…

भईया, हम भी नहीं है 'बुद्धिजीवी' .........एकदम ही 'च पर ऊ की मात्रा' है !
बुद्धिजीवी को जिस हिसाब से परिभाषित किये हो ................'च पर ऊ की मात्रा' होने में ही भलाई है !!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

औरों की बुद्धि पर जीवित ये बुद्धिजीवी।