मंगलवार, 17 जनवरी 2012

दिल को देखो चेहरा न देखो.... :- देव

अबे ई बताओ तुम कपडा केतना का पहनिता है, इ जौन पैर में जूत्ता पहिरे हौ ऊ कऊने बिरान्ड का हौ... रे हम त सब कुछ बिरान्डे बाला पहिनता है... दूssर बुरबक सब..... ई सदवचन हमरे सोसाईटी के पहरेदार का है भाई..... अब सुनिये एक ऐसा वाक्या जो आपको गुदगुदाएगा भी और सोचनें पर मजबूर भी कर देगा..... 

 देव बाबा पिछले कुछ दिनों पहले अपने आफ़िस के कार पार्किंग में खडे थे.... वह भी अपनी कार से टेक लगाए..... कोई आनें वाला था जिसका इंतज़ार कर रहे थे....  तबहीं हमारा आफ़िस का पहरेदार आया और बोला, गाडी से दूर खडे होनें का..... गाडी से टेक लगाके खडे नहीं होने का.... हम बोले भईया क्या हुआ.... वह भडका और बोला एक बार बोला समझ नहीं आता..... हमको बोला गया है की कोई कार टच नहीं करे.... सो जाओ इधर से दूर खडे हो...... मन ही मन सोचे, चलो अच्छा है मतलब यहां पर गाडी सुरक्षित है :-) लेकिन ये पहरेदार ज़रा जियादे ही स्टैंडर्ड गिरा के बात कर रहा है बे.....  हम बोले ठीक है भाई, कार का दरवाज़ा खोले और अन्दर जा के बैठ गये..... वो हमको देखते रह गया..... ऊ सरवा सोचा ही नहीं था की ई कार हमारा हो सकता है..... बाद में हमको बोला साहब हम पहचानें नहीं आपको...... हम कहे रे तुम हमको नहीं पहचाना लेकिन हम समझ गये......  समझे की नहीं..... :-) 

अब सुनिएं एक और बात..... मनीषा जी और हम बाज़ार से सामान ले के आये, सामान को अरेंज करनें के लिए हमारी धर्मपत्नी नें पीछे की सीट का रुख किया.... हम अपना ड्राईवरी करते रहे.... अपनें सोसाईटी के दरवाज़े पर पुरानें पहरेदार के साथ एक नया पहरेदार भी था..... हम पुरानें पहरेदार से बतियानें लगे.... अऊर का हाल चाल बा, घरै जाए के पिलानिंग कहिया के बा..... रे तू महानगरिया में रेज़र्भेसन देख.... होली के टाइम के बुकिंग तीन महीना पहिने करा लीह नाही त तत्काल के कोनो भरोसा नईखे..... ई बात पुरनका पहरेदार के संगे संगे नयका पहरेदार भी सुना.... ऊ हमको पक्का डिराईबर समझ लिया.....  उसी रात में हम थोडा काम से नीचे उतरै, ई सब पहरेदार आग जला के चारो ओर बईठा था, ऊ सब फ़िर हमको बोला की आब भईया तनि आप भी आए जाएं.... हम फ़िर से मिसरा को पूछे रिजर्भेसन कराया के नहिं..... और फ़िर पांच मिनट के बाद जानें की तईयारी में आगे बढे.... ऊ नया बाला पहरेदार बोला.... रे चल जईब, अबहीं त पूरा रात बकिए ह.... तनि आग ताप फ़ेन सूतै के देखल जाई..... हम चुपचाप.... लेकिन तुरत समझ लिए की ई हमको एकरै कम्यूनिटी का बूझ रहा है..... लेकिन हमारा पुराना पहरेदार मिसरा बोल दिया की साहब यहीं रहते हैं न.... सो रात हो रहा है, साहब जाईए..... हम चुपचाप से उठे और उपर आ गये.......  अब देखिए.... दिल को देखो चेहरा न देखो वाली बात पुरानी हुई..... हम तो कपडे बोलते हैं वाली बात अधिक प्रासंगिक लगती है......

हम और हमारा जम्बो.....
लेकिन उस बेचारे की कोई गलती भी तो नहीं थी... आखिर मेरी त्वचा से मेरे स्टेटस का पता ही नहीं चलता..... :-)

7 टिप्‍पणियां:

Stuti Pandey ने कहा…

हा हा ... का भईया...का दिन आ गया है, जाईये हबिबवा के यहाँ मेक ओभर करवा के आईये. "जरा डेंटिंग पेंटिंग हो जाए फिर मेरी चाल देखना" :D :D

देव कुमार झा ने कहा…

हा हा :-)

रश्मि प्रभा... ने कहा…

.... :-)

शिवम् मिश्रा ने कहा…

अबे बुरा मत मानो ... सुने नहीं हो क्या बे ... "ज़माना तो है नौकर बीवी का" ... इस लिए मान लो हम सभी लगभग एक ही कम्यूनिटी के है ... ;-) बाकी यह तुम सही बोले कि "आखिर मेरी त्वचा से मेरे स्टेटस का पता ही नहीं चलता..... :-) "

सदा ने कहा…

वाह .. बहुत खूब ।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

इस दुनिया में मुँह के अलावा सबकुछ बोलता है...

सतीश सक्सेना ने कहा…

प्रभावशाली हैं आप ...
शुभकामनायें आपको !