शुक्रवार, 9 जुलाई 2010

शनिवार की सुबह.... उ आ........... ह्म्म्म

यार मेरे मित्र, शनिवार की सुबह ही क्यों आते हैं..... गुर्र गुर्र.....
अच्छा भला सो रहा था और जगा दिया..... उ आ........... ह्म्म्म. चलो भाई मेहमान भगवान् होता है.. सो भगवान् से कैसा बैर.... आया तो फिर चाय पिला दिए और क्या.... उंघते उंघते किसी तरह.... बड़ी नींद आ रही थी ... यार वैसे जब उठ गए तो फिर एक बार बाहर भी निकल गए... यकीन मानिये... मजा बहुत आया... बारिश की बूंदे.... सड़क पर जमा पानी.... उसमे छपका लगाते हुई कुछ कौवे.... वाह वाह... और बारिश में भीग कर एकदम चटक रंग में चमक रही हमरी गड्डी.... वाह वाह.... लाल परी जगमगा रही थी देव बाबा की....

यार इस बार का शनिवार बहुत इंतज़ार कराने के बाद आया था, सप्ताह की शुरुआत ही भारत बंद के साथ हुई थी... और फिर तीन सप्ताह के बाद काम पर वापस आने की वजह से वैसे ही थोड़ी एफिसिएंसी डाउन थी... मुम्बई जैसे शहर में जहाँ भागम भाग हमेशा लगी रहती है और इस भागम भाग के बीच खुद के लिए कुछ पल चुरा पाना..... मुश्किल है यार.... ऑफिस से घर... और फिर नींद पूरी करने में ही २४ घंटे पास..... वैसे में ऐसे मेहमान.... यार शनिवार के दिन.... वह भी सुबह के सात बजे.....

लो एक गीत सुनो....

10 टिप्‍पणियां:

शिवम् मिश्रा ने कहा…

अब सो लो यार !!

देव कुमार झा ने कहा…

हां जा रहा हूं सोने........ नींद आ रही है...
ऊं. आअ......... ह्म्म्म्म्म

आचार्य उदय ने कहा…

सुन्दर गीत।

हिमान्शु मोहन ने कहा…

आपको बधाई, सुबह-सुबह जो गीत आपने आचार्य जी को सुनाया - उसके लिए। वाकई सुन्दर रहा होगा…
आप सुबह-सुबह उठ कर सुन्दर गीत गाते हैं ये हमें पता न था। आचार्य जी के लिए ही सही - आप किसी के लिए तो गा रहे हैं। बाक़ी बनारस में बताए देते हैं कि आप आजकल आचार्य जी के लिए गीत गाते हैं - अलस्सुबह…

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

छुट्टियाँ वरदान बन कर आती हैं।

Udan Tashtari ने कहा…

काहे दरवाजा खोले..दो एक घंटी बजा कर चला जाता. :)

ललित शर्मा ने कहा…

एक गाना सुनने के लालच में कई गाने सुन गए
अच्छी पोस्ट

आपकी पोस्ट चर्चा ब्लाग4वार्ता पर

राम त्यागी ने कहा…

मुझे बहुत नींद आ रही है इस वक्त

संजय भास्कर ने कहा…

to so jaao

E-Guru Rajeev ने कहा…

ज़रा हटके ज़रा बचके
ये है बौम्बे मेरी जाँ.