सोमवार, 3 मई 2010

एक बढ़िया सी अदरक वाली चाय पिलाओ

घंटो के इंतज़ार के बाद
अशान्ति से शान्ति की खोज में
जा पहूंचा कैन्टीन में
और फ़िर वहां मिली मुझे
मेरी प्रेयसी
बस उसे देखते ही मैं
खिल उठा..
उसे देखते ही मेरा
मन मचल उठा..
जल्दी ही वह
मेरे होठों से लगी
और मैं झूम उठा...
मिट गयी मेरी थकन
मिट गयी मेरी उलझन
वाह वाह
वह एक प्याली अदरक वाली चाय...



कुछ ऐसा है मेरा और चाय का साथ, मेरे को तो कोई रात के दो बजे भी बोले की चाय पियोगे तो मैं मना नहीं करुं.... अब कमबख्त कोई चाय को भी मना करता है क्या। आज कल ओफ़िस में थोडा परिश्रम अधिक हो जा रहा है, यूं कहें की दिहाडी मज़दुर अपनें काम में पूरी तरह व्यस्त रहता है । उसी उधेडबुन और काम काज की मारा मारी में आज की चाय मिस हो गयी थी... मगर फ़िर जब चाय के साथ वाय भी मिला तो फ़िर क्या कहनें साहब यह कविता बन गयी।

वैसे चाय के भी अजीब रूप होतें हैं... अम्मा की चाय में तो तुलसी के पत्ते और अदरक ज़रुर होते, शशि भैया के यहां भाभी जी के हाथ की चाय के तो कहनें ही क्या... भई एकदम मजे वाली चाय होती है... और चाय के साथ वाय और गुन-गुन की हंसी और शशि भैया के किस्से और कहानियां बस वाह वाह..

वैसे चाय के साथ कई किस्से और कई रोचक प्रसंग जुडे होते हैं, ऐसा ही एक प्रसंग आप लोगों को सुनाता हूं । एक बार हमारे एक परिवारिक मित्र के यहां कुछ मेहमान आ गए, अब साहब नई नई शादी के बाद एकदम से हुए मेहमानों के आक्रमण से नयी दुल्हन तो वैसे ही घबरा गयी थी । चाय की डिमाण्ड हुई और फ़िर हम मेहमानों नें तो रट लगाई थी कि आज तो भई चाय पी के ही जाएंगे । बेचारी नई दुल्हन से घबराहट में थोडी गलती हो गयी और उससे शक्कर की जगह चाय में नमक पड गयी... अब साहब चाय तो सामनें आ गयी और सारे मेहमानों ने बडे ही उतावले पन से चाय की प्याली को अपने होंठो से लगाया... भई सारे लोगों के चेहरे देखने लायक थे... वैसे मेहमानों ने कैसे भी करके चाय एक एक चुस्की मार मार के पीनी शुरू की । हमारे मित्र को थोडी देर के बाद समझ आया की कुछ गडबड है और फ़िर जो ठहाका हुआ भई क्या बताएं आप लोगों को...

वैसे चाय चाहे कैसी भी हो... चाहे कटिंग चाय हो...
या फिर दौ सौ रूपये एक कप वाली चाय हो....
अगर कोई मन से पिलाये तो फिर चाय की प्याली में
उमड़ आते हैं सारे भाव
उमड़ आते हैं सारे विचार
लोग पास आ जाते हैं
आपसी क्लेश मिट जाते हैं
तो फिर मेरे भाइयों
आओ मन की दूरियों को मिटाओ
आज ही शाम देव बाबा को
चाय पे बुलाओ.... और एक बढ़िया सी अदरक वाली चाय पिलाओ....


-देव

8 टिप्‍पणियां:

खुशदीप सहगल ने कहा…

देव भैया,
आज चाय तो नहीं अपनी पोस्ट पर कॉफी पिला रहा हूं...

वैसे स्कूल के टाइम में हमारी एक चांडाल चौकड़ी होती थी...कैंटीन वाले के पास जाकर मज़े लेने के लिए कहते थे...एक चाय पांच कप में देना...एक दिन कैंटीन वाला हमसे भी ज़्यादा मूड में था...चाय पीने की ज़ेहमत क्यों करते हो...सब के सब चाय के इंजेक्शन लगवा लो न...

जय हिंद...

मो सम कौन ? ने कहा…

वाह, चाय पुराण बांचने में वैसा ही मजा आया जो अदरक वाली चाय में होता है।
देव बाबा, आ जा कदी पंजाब विच, लिप्टन दी चा मिलेगी :)

शिवम् मिश्रा ने कहा…

चाय चाय गरम ................. देव भाई चाय चलेगी ??

Shekhar Kumawat ने कहा…

bahut khub

bahut bahut badhai

shekhar kumawat

कुश ने कहा…

सब चाय की महिमा है ..

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

का देव बाबा आदी मिलएला से का चाह का निकोटीन खतम हो जाता है. देखिए भाई हम त बड़ा जेठ हैं त सलाह देबे करेंगे. एतना चाह पीना ठीक बात नहीं है. निकोटीन से थाएमीन हाइड्रोक्लोराइड, माने बिटामिन कम हो जाता है. इसी से लगता है कि ताजगी आ गया है. जवान अदमी को एतना चाह नहीं पीना चाहिए. बाकी बतिया हम चाह पीने के बाद लिखेंगे...

Apanatva ने कहा…

chay ko le nakhare bhee hume bahut uthane padte hai koi kahta hai light koi farmaish karta hai strong,koi kahta hai masala daliye koi kahta hai adrakh
kisee ko ilaichee chahiye to kisee ko doodh kum jitne log utnee hee tarah kee pasand .subko khush kar liya to mano kila fatah kar liya........
aur sugar kee matra kee to alag hee kahanee hai .kai sugar free wale bhee hai.....ye to thee sugar kee mithas.............
vaise ma aur bhabhee kee tarif pad rishto kee mithas acchee lagee......

बेनामी ने कहा…

JAI BOLO DEV BABA..
KHUB KAHA YE CHAI PURAN,

DARASAL, CHAI TO EK BAHANA HAI..KAAM KAJ ME SE EK BREAK CHAHIYE HOTA HAI..EK BREAK PYARA SA. !!