रविवार, 25 अप्रैल 2010

चाहूंगा मैं तुझे, सांझ सवेरे

निःस्वार्थ मित्रता पर सर्व-श्रेष्ठ गीत...
वैसे यु-ट्युब पर इधर उधर के कुछ विड्योज़ देख रहा था, और फ़िर सोचा कि क्यों ना दोस्ती का एक वीडिओ आप लोगों के साथ भी बांटा जाए..... वाकई दिल को छू लेने वाला और मधुर गीत...

चाहूंगा मैं तुझे, सांझ सवेरे
फ़िर भी कभी अब नाम को तेरे
आवाज़ मैं ना दुंगा



-देव

2 टिप्‍पणियां:

honesty project democracy ने कहा…

उम्दा सोच पर आधारित प्रस्तुती के लिए धन्यवाद / ऐसे ही सोच की आज देश को जरूरत है / आप ब्लॉग को एक समानांतर मिडिया के रूप में स्थापित करने में अपनी उम्दा सोच और सार्थकता का प्रयोग हमेशा करते रहेंगे,ऐसी हमारी आशा है / आप निचे दिए पोस्ट के पते पर जाकर, १०० शब्दों में देश हित में अपने विचार कृपा कर जरूर व्यक्त करें /उम्दा विचारों को सम्मानित करने की भी व्यवस्था है /
http://honestyprojectrealdemocracy.blogspot.com/2010/04/blog-post_16.html

संजय भास्कर ने कहा…

.बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।