रविवार, 21 मार्च 2010

मूर्ति.... एक लघु कथा.

मूर्ति.... एक लघु कथा......... देव बाबा की कलम से ....

पापा यह कौन हैं... बेटा यह पंडित नेहरु की मूर्ति है... देश के पहले प्रधान मंत्री थे और बच्चे उनको चाचा नेहरु बोलते थे | नेहरु जी की मूर्ति देख कर नन्हा मुन्नू बहुत खुश हुआ |
अगले रास्ते पर एक और मूर्ति देख कर नन्हा मुन्नू फिर बोला, पापा यह कौन हैं... बेटा यह बाबा साहेब आंबेडकर हैं, इन्होने हमारे देश का कानून बनाया... बेटा यह हमारे देश के बहुत बड़े महा-पुरुष थे... हमें इनके दिखाए रास्ते पर चलना चाहिए... मुन्नू पापा से अच्छी अच्छी बातें सुन कर बहुत खुश हो रहा था....

अगले रास्ते पर पटेल और पंडित जी की मूर्तियों को देख कर नन्हा मुन्नू बहुत खुश हो रहा था.... और बोल रहा था की पापा यह सभी लोग अभी कहाँ हैं,.... पापा ने नन्हे मुन्नू को बड़े प्रेम से समझाया की बेटा यह सभी लोग अब स्वर्ग-वासी हो चुके हैं और हमारे लिए अच्छी बाते छोड़ गए हैं... और हमें उन्ही रास्तो पर चलना चाहिए.... |

एक और रास्ते पर एक काली सी मूर्ति जिसमे चेहरा एकदम दिखाई नहीं दे रहा था, और चारो तरफ चिड़िया, कबूतरों ने गन्दगी फैलाई हुई थी.... मुन्नू ने पूछा पापा यह कौन हैं.... बेटा यह गाँधी जी हैं हमारे देश के राष्ट्र पिता | पापा क्या इन्होने कोई अच्छी बात नहीं बताई... क्योकि बाकी सभी मूर्तियाँ चमक रही थी मगर यह तो एकदम गन्दी है| नहीं नहीं मुन्नू बेटा गाँधी जी ने तो हमें बहुत अच्छी अच्छी बाते बताई हैं...., तो फिर पापा यह मूर्ति इतनी गन्दी क्यों है |

पता नहीं बेटा.... अभी मुन्नू के प्रश्न का कोई उत्तर नहीं सूझ रह था.... मन ही मन समीर सोच रहा था.... की क्या उत्तर दे.... शहर में घूमते हुए सांझ होने लगी थी और गाड़ी से झांकते मुन्नू की नज़र नीली रौशनी में चमकती हुई मायावती की मूर्ति पर पड़ रही थी.... समीर अब एकदम परेशान था की मुन्नू के अगले सवाल का क्या उत्तर देगा......


देव
मार्च २१, २०१०

2 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

दोनों सवाल हमारी ही करनी के नतीजे से पैदा हुए हैं. गाँधी जी के मूल्य हम संजो नहीं पाये और मायावति जैसे लोगों को चुन कर ले आये..ऐसे में पीढ़ियाँ तो जबाब मांगेगी ही!!

सुन्दर विचारणीय लघु कथा.

Haramohan ने कहा…

Sirji Yese dekha jaye to Gandhiji aur Mayavatiji mein koi phark to dikh nahin raha. Dono hi bish karod public ke neta the jo third division ya angutha chap hone ke bad bhi sabhi topper ko apne unglion pe nacha rahe the. Jay ho indian shrud politicians. aal is welllll .