सोमवार, 15 मार्च 2010

ज़रा शहर से बारूद की बू तो हटने दो...

बरेली जल रही है... मेरी बरेली... | वही शहर जिसने मुझे कौमी एकता और सर्व धर्म समभाव का पाठ सिखाया, वही आज जल रहा है.... | मुझे याद आता है बरेली का प्रेम नगर वाला इलाका, मॉडल टाउन में जहाँ सिक्ख बहुल क्षेत्र होने के बावजूद कभी कोई दिक्कत नहीं हुई... मुझे नहीं याद मेरे सोलह, सत्रह साल के प्रवास के दौरान कभी कोई ऐसी घटना हुई हो | यार ऐसा हो तब भी नहीं हुआ जब पुरे देश में बवाल हो रहा था | बरेली तो हमेशा से एकदम शांत और सुकून से जीने वाला शहर रहा है, फिर ऐसा क्या हो गया जो पंद्रह दिन में सौ करोड़ की संपत्ति जला दी गयी, बसें जला दी गयी, जिन सडको पर जहाँ हमने सायकिल चलानी सीखी, अपने दोस्तों के साथ पतंगे उड़ाई आज खून और आग से लाल हैं | ऐसा क्या हो गया.... आखिर राज्य की सरकार कर क्या रही थी... आखिर क्यों मुठ्ठी भर अ-सामाजिक तत्वों को मौका दिया जाता है की वह ऐसी बड़ी वारदातें कर जाते हैं... दर-असल जो हुआ जैसे हुआ.... जो भी ज़िम्मेदार हो... अगर समय रहते कुछ किया गया होता तो ऐसी बुरी बात नहीं होती... | आखिर कौमी एकता और गंगा ज़मुनी तहजीब की एक अजीमो-शान मिसाल है बरेली शहर... एक ऐसा शहर जिसने लोगों को सोचना सिखाया है... की कैसे सभी धर्मो के लोगों के बीच सम-भाव और एकता बनी रह सकती है | शायद बाहर की दुनिया को नहीं मालुम होगा की बरेली दुनिया में शायद ऐसी अकेली जगह होगी जहाँ चुन्ना मियां का मंदिर है, और वह भी लक्ष्मी नारायण का | एक ऐसा शहर जहाँ एक मुसलमान हिन्दुओ के लिए मंदिर बनवा सकता है.... क्या वहां किसी और के लिए कोई और मिसाल शेष रह जाती है ? बताइए ...

यार जिसने आग लगायी होगी, वह ना तो मुस्लमान होगा और ना ही हिन्दू होगा.... | आखिर इसको अब कोई ख़त्म तो करे, आखिर कोई तो शांति के वचन बोले... अगर आप राज्य की सरकार से उम्मीद कर रहे हैं, तो बेमानी है | राज्य की सरकार और राज्य की मुखिया मायावती का सीधा साधा मन्त्र है, जिस क्षेत्र से वोट नहीं, उस क्षेत्र को मदद नहीं | अब बरेली में मायावती का हाथी हमेशा से फुस्स रहा है तो फिर सरकारी मदद भी नहीं मिलनी चाहिए ना... आखिर जिस क्षेत्र से वोट नहीं उस क्षेत्र पर सरकारी सहायता नहीं ? आखिर यह किस प्रकार का राजनीतिक आचरण है, भगवान् ही जाने.... | आखिर अब बरेली को वापस पटरी पर लाने के प्रयास होने चाहिए.... देश में बरेली हमेशा से अपने सद-भाव पूर्ण माहौल की वजह से शांत शहरों की श्रेणी में रहा है, एक ऐसा शहर जिसकी आबादी का एक बड़ा हिस्सा मुस्लिम और सिख है... हमेशा अपने सर्व-धर्म प्रेम-पूर्ण माहौल का प्रतीक रहा है | अब इसको वापस अपने पूर्व स्वरूप में लाना होगा.... |

मेरी कविता की दो लाइने ....
चिरागों को जलाओ
शहर को रोशन तो होने दो...
परिंदे फिर से अपनी मंजिलों पर लौट आयेंगे...
ज़रा शहर से बारूद की बू तो हटने दो...




बस बरेली वापस अपने पुराने रूप में आ जाये और फिर से आला हजरत की दर-गाह रोशन हो सके.... फिर से चुन्ना-मियां के मंदिरों की घंटियों की आवाज से फिजा गूंज सके... फिर से सुबह गुद्दर बाग़ के मंदिर से आने वाली रामायण की आवाज रजाई में सोते सोते मेरे कानो में मीठी मुस्कान घोल सके..... फिर से बरेली अपनी पुरानी पहचान पा सके..... पुरानी रंगत पा सके...

देव
१५ मार्च २०१०

5 टिप्‍पणियां:

Suman ने कहा…

nice

Unix and Shell Script ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Unix and Shell Script ने कहा…

Sach me Uttar Pradesh ki janta ko aab Jagana chahiye..kahi aaisa na ho ki wo jage tab tak kafi vilamb ho jai..Mayawati aur Mulayam jaise logo ko sire se hata dena chahiye .... ye Prashashan aur Rajniti ke Badubadar kheede hai... jinhe har taerah se saaf kar dena chahiye...

रवि कुमार, रावतभाटा ने कहा…

बहुत अच्छी बात...
धर्म हैं...इसीलिए सद्‍भाव की जरूरत हैं...
धर्म हैं...इसीलिए टकराव की सम्भावनाएं हैं....

Haramohan ने कहा…

Bhai ek baat bataiye Isme bura kya hai, Jab ladhai nahi karenge to pyar kaise karenge,

Jaab pyar se rahte the to ladhna jhagadna sikh liye, Ab ladhan jhagdna sikh liye to sadbhavna sikh lenge thode. Trying to be more positive :-(